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चंद्र ग्रहण दोष

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चंद्र ग्रहण दोष: कारण, प्रभाव और समाधान चंद्र ग्रहण दोष ज्योतिषशास्त्र में एक महत्वपूर्ण और…

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गुण मिलान का सही जीवनसाथी चुनने के लिए महत्व

गुण मिलान: सही जीवनसाथी चुनने के लिए हमारा विशेषज्ञ समाधान

जीवन में सही जीवनसाथी का चयन करना हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है। विवाह केवल दो लोगों का मेल नहीं, बल्कि यह दो परिवारों और संस्कृतियों का संगम भी है। इसे सफल बनाने के लिए दोनों व्यक्तियों के बीच मानसिक, शारीरिक, और भावनात्मक तालमेल होना अनिवार्य है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में विवाह से पहले कुंडली मिलान को अत्यधिक महत्व दिया जाता है।

गुण मिलान का सही जीवनसाथी चुनने के लिए महत्व :

कुंडली मिलान, जिसे गुण मिलान भी कहा जाता है, वैदिक ज्योतिष का एक विशेष भाग है। यह प्रक्रिया जीवनसाथी की अनुकूलता का विश्लेषण करती है और विवाह के बाद आने वाली संभावित समस्याओं की पहचान करने में मदद करती है।

गुण मिलान में प्रमुख आठ कारक (अष्टकूट) का विश्लेषण किया जाता है:

1. वर्ण – मानसिक अनुकूलता।
2. वास्य – भावनात्मक जुड़ाव।
3. तारा – भाग्य का मेल।
4. योनि – शारीरिक और जैविक अनुकूलता।
5. ग्रह मैत्री – आपसी सामंजस्य।
6. गण – स्वभाव का मेल।
7. भकूट – पारिवारिक और वैवाहिक जीवन।
8. नाड़ी – स्वास्थ्य और वंश।

कुल मिलाकर 36 गुण होते हैं, जिनमें से कम से कम 18 गुणों का मिलना शुभ माना जाता है।

गुण मिलान के लिए हमारे विशेषज्ञ कैसे मदद करते हैं?

हमारी अनुभवी ज्योतिषियों की टीम हर जोड़े की कुंडलियों का गहराई से अध्ययन करती है। हमारी प्रक्रिया केवल गुण मिलान तक सीमित नहीं है। हम विवाह के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे दाम्पत्य जीवन की स्थिरता, आर्थिक समृद्धि, और स्वास्थ्य से जुड़े योगों का भी विश्लेषण करते हैं।

क्यों चुनें हमें?

1. व्यक्तिगत ध्यान: हर क्लाइंट की कुंडली का गहन अध्ययन और व्यक्तिगत रिपोर्ट।
2. विज्ञान और परंपरा का मेल: आधुनिक तकनीकों के साथ प्राचीन वैदिक ज्योतिष का संतुलन।
3. समाधान केंद्रित दृष्टिकोण: संभावित समस्याओं के उपाय भी प्रदान करते हैं।
4. गोपनीयता की गारंटी: आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गोपनीय रखी जाती है।

गुण मिलान में संदेह हो तो हमसे संपर्क करें

अगर आप अपने विवाह को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं, तो हमारे विशेषज्ञ आपकी सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं। हमारी सेवाएं न केवल आपकी समस्याओं का समाधान करती हैं, बल्कि आपके भविष्य को भी सुरक्षित और सुखमय बनाती हैं।

अपना सही जीवनसाथी चुनने का पहला कदम उठाइए।
अभी हमसे संपर्क करें और हमारे गुण मिलान विशेषज्ञों से परामर्श लें। आपकी खुशहाल और स्थिर वैवाहिक जीवन की शुरुआत यहीं से होती है।

हमारी वेबसाइट पर विजिट करें या हमें कॉल करें!
आपका विश्वास, हमारा अनुभव।

आपके सुखद भविष्य की कुंजी हमारी विशेषज्ञता में है।

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ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन की दिशा को समझें ujjain pandit ji

ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन की दिशा को समझें

क्या आप अपने जीवन के सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं? क्या आपको अपने करियर, रिश्तों या भविष्य को लेकर दुविधा है? ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से आप अपने जीवन से जुड़े हर सवाल का समाधान पा सकते हैं। एक अनुभवी ज्योतिषी के रूप में, हम आपकी समस्याओं का समाधान और आपके जीवन की दिशा को स्पष्ट करने के लिए यहां है।

हमारी ज्योतिष सेवाएं क्यों चुनें?


• सटीक भविष्यवाणियां: आपके जन्म कुंडली का गहराई से विश्लेषण करके हम सटीक और अर्थपूर्ण जानकारी प्रदान करते है ।
• व्यक्तिगत मार्गदर्शन: हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, और हम उसी के अनुसार व्यक्तिगत सलाह देते है ।
• समग्र दृष्टिकोण: परंपरागत ज्योतिषीय तकनीकों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का उपयोग करते है ।

हम क्या सेवाएं प्रदान करते है?

जन्म कुंडली विश्लेषण: अपने स्वभाव, ताकत, कमजोरियों और जीवन के उद्देश्य को जानें।

  • रिश्तों की अनुकूलता: अपने संबंधों को बेहतर बनाने के उपाय पाएं।
  • करियर और वित्तीय मार्गदर्शन: अपने करियर को सही दिशा में ले जाने के लिए ज्योतिषीय सलाह प्राप्त करें।
  • गोचर भविष्यवाणी: आने वाले ग्रहों के प्रभाव को समझें और उसके अनुसार अपने जीवन में बदलाव करें।

क्लाइंट की संतुष्टि हमारी प्राथमिकता

हमारी ज्योतिष सेवाओं में आपका संतोष सर्वोपरि है। हम एक ऐसा वातावरण प्रदान करता हूं जहां आप अपने सवाल खुलकर पूछ सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए समाधान पा सकते हैं।

क्या आप अपने जीवन के रहस्यों को जानने के लिए तैयार हैं? आज ही हमसे संपर्क करें और अपनी व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श बुक करें।

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शनि चंद्र (विषदोष)

क्या होता है शनि चंद्र विष दोष ?

शनि और चंद्र ग्रह का एक साथ कुंडली में बैठना (जिसे “विष दोष योग” या “शनि-चंद्र का संयोजन” भी कहा जाता है) एक महत्वपूर्ण स्थिति है और इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर विभिन्न तरीके से हो सकता है। यह संयोजन व्यक्ति की मानसिक स्थिति, भावना, और जीवन के कठिनाइयों के प्रति दृष्टिकोण पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

शनि चंद्र (विषदोष) कुछ मुख्य प्रभाव :

1. मानसिक तनाव और चिंता:
चंद्रमा मन, भावना और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है, जबकि शनि कर्म, प्रतिबद्धता, और कठोरता का प्रतीक है। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो व्यक्ति में मानसिक तनाव, अवसाद, या चिंता की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यह संयोजन व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करने के लिए मजबूर कर सकता है, जिससे वे मानसिक रूप से चिड़चिड़े या असुरक्षित महसूस कर सकते हैं।
2. अनुशासन और संयम:
शनि का प्रभाव व्यक्ति को कड़ी मेहनत, अनुशासन, और जिम्मेदारी की ओर प्रेरित करता है। चंद्रमा के साथ संयोजन से व्यक्ति को मानसिक रूप से अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है, और इस संयोजन से व्यक्ति में आत्म-नियंत्रण और संयम की भावना भी विकसित हो सकती है।
3. आवश्यकता से अधिक जिम्मेदारी:
यह योग व्यक्ति को जीवन में जिम्मेदारियों का सामना करने की प्रवृत्ति देता है। ऐसे लोग खुद को मानसिक दबाव में महसूस कर सकते हैं क्योंकि उन्हें हमेशा अपनी भावनाओं और कार्यों पर कड़ी निगरानी रखनी पड़ती है।
4. भावनात्मक अस्थिरता:
शनि के कठोर और चंद्रमा के परिवर्तनशील स्वभाव के कारण व्यक्ति की भावनाओं में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। कभी-कभी यह संयोजन व्यक्ति को अवसादित और उदास महसूस करवा सकता है, जबकि अन्य समय पर वे खुद को मानसिक रूप से मजबूत और समर्थ महसूस कर सकते हैं।
5. जीवन में विलंब और कठिनाइयाँ:
शनि का प्रभाव समय की धीमी गति और मेहनत से जुड़ा होता है। चंद्रमा के साथ मिलकर, यह व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में अधिक समय और प्रयास की आवश्यकता महसूस करा सकता है। इसके बावजूद, एक बार यदि व्यक्ति लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तो वह संतुष्ट और स्थिर महसूस कर सकता है।

शनि चंद्र (विषदोष) उपाय:

• नियमित रूप से मानसिक शांति के लिए ध्यान या योग करना।
• शनि और चंद्रमा से संबंधित रत्न जैसे नीला सफायर या मोती पहनना (कुंडली के अनुसार)।
• शनि और चंद्रमा के दोषों को सुधारने के लिए पूजन, व्रत, उपवास, और दान करना।

कुल मिलाकर, शनि और चंद्रमा का संयोजन व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयाँ ला सकता है, लेकिन यदि सही तरीके से समझा और समाधान किया जाए, तो यह व्यक्ति को मानसिक मजबूती और स्थिरता भी प्रदान कर सकता है।

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Mangal dosh bhat puja

मंगल दोष क्याँ है ? Mangal Dosh

ज्योतिष के अनुसार कुण्डली में १२ भाव ( घर ) होते है जिसमें से प्रथम , चतुर्थ , सप्तम , अष्टम एवं द्वादश भाव में मंगल की उपस्थिति होती है तो मंगल दोष का निर्माण होता है अर्थात् किसी पुरुष या स्त्री की जन्म पत्रिका में 1,4,7,8,12 भाव में अगर मंगल बैठता है तो वह जातक मांगलिक कहलाता है ! यदि आपको विवाह में विलंब होता है या विवाह नहीं हो पा रहा है या वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है तो आपकी पत्रिका में मंगल दोष हो सकता है ।

कैसे बनता है जन्मकुंडली में मंगल दोष ?

आपकी जन्म पत्रिका में प्रथम चतुर्थ सप्तम अष्टम और द्वादश भाव में मंगल बैठता है तो पत्रिका में मंगल दोष का निर्माण होता है

मंगल दोष के लक्षण ( कैसे पता करे हम मंगल दोष से पीड़ित है या नहीं )

  1. विवाह में देरी जो व्यक्ति मांगलिक होता है उसके विवाह में देरी होती है ।
  2. मंगल दोष के कारण विवाह में देरी के साथ संबंध टूटना विवाह तय होकर छूट जाना ।
  3. विवाह के बाद जीवनसाथी के साथ नहीं बनना या मतभेद या लड़ाई झगड़ा ज्यादा होना ।
  4. एसा जातक अहंकारी और अत्यधिक चिड़चिड़ा, क्रोधी स्वभाव का होता है ।
  5. किसी भी प्रकार के वैवाहिक सुख का भोग नहीं कर पाता है
  6. कर्ज से परेशान रहता है ।
  7. मांगलिक जातक के २ विवाह होने की भी संभावनायें रहती है
  8. किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका रहती है ।
  9. व्यापार नौकरी और परिवार सुख में भी कमी करता है ।

मंगल दोष को दूर करने के उपाय

मंगल दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए आप निम्नलिखित उपायो को अपना सकते है :-

  • मंगलवार का व्रत करे
  • ⁠ॐ भौमाय नमः इस मंत्र का जाप करे
  • ⁠हनुमान चालीसा का पाठ करे
  • ⁠उज्जैन में मंगल नाथ मंदिर या अंगारेश्वर मंदिर पर मंगल भात पूजन करे
  • ⁠भगवान शिव की आराधना करे

जातक की कुंडली मे मंगल दोष हो तो, उसे घर बनवाते समय लाल पत्थर का उपयोग करना चाहिए।
बंदरो को गुड और चना खिलाने से मंगल दोष के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
दो मुट्ठी मसूर लाल कपड़े मे बाँधकर भिखारी को दान देना चाहिए।
जहाँ आप सोते है, उस कमरे मे लाल कपड़े मे सौफ बांधकर रखना चाहिए।

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kaal sarp dosh puja

Kaal Sarp Dosh : कुंडली में कब बनता है ? काल सर्प दोष क्या है ? कालसर्प दोष के प्रभाव क्या है ?

जब किसी की जन्मकुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते है अर्थात् कुंडली का एक हिस्सा ख़ाली हो जाता है एसी परिस्थिति में कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण होता है ।
यदि आप काला नीला कपड़ा अधिक पहनते है या आप नशा करते है या आप मांसाहार का सेवन करते है या फिर आपके कार्य होते होते रुक जाते है तो हो सकता है आपकी पत्रिका में कालसर्प दोष ।

ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को बहुत ही अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है तो व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुंडली में काल सर्प दोष होने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होता है। इसलिए कालसर्प दोष की पूजा पूरे विधि विधान के साथ होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कालसर्प दोष क्या है, कालसर्प दोष की पूजा विधि और फायदे

कालसर्प दोष के लक्षण क्या है ?

  • यदि आप काला नीला कपड़ा पहन ना अधिक पसंद करते है।
  • ⁠यदि आपके शिक्षा क्षेत्र या वैवाहिक क्षेत्र में समस्या आती है ।
  • ⁠यदि आपके कार्य होते होते रुक जाते है।
  • ⁠यदि मानसिक तनाव से परेशान रहते है।
  • ⁠यदि आपको सर्प से भय लगता है या स्वप्न में सर्प दिखते है।
  • ⁠यदि आपको कोई स्वास्थ संबंधी समस्या लगातार रहती है।

1) जिस व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होते हैं इस व्यक्ति को अक्सर सपने में मृत लोग दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं कुछ लोगों को तो यह भी दिखाई देता है कि कोई उनका गला दबा रहा हो।

2) जिस व्यक्ति के जीवन में काल सर्प दोष होता है उसे जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है और जब उसको जरुरत होती है तब उसे अकेलापन महसूस होता है।

3) कालसर्प से पीड़ित व्यक्ति के कारोबार पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है। इसे व्यापार में बार बार हानी का सामना करना पड़ता है।

4) इसके अलावा नींद में शरीर पर सांप को रेंगते देखना, सांप को खुद को डसते देखना।

5) बात-बात पर जीवनसाथी से वाद विवाद होना। यदि रात में बार बार आपकी नींद खुलती है तो यह भी काल सर्प दोष का ही लक्षण है।

6) इसके अलावा काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को सपने में बार-बार लड़ाई झगड़ा दिखाई देता है।

7) काल सर्प दोष के कारण व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होता है। साथ ही सिर दर्द, त्वचारोग आदि भी कालसर्प दोष के लक्षण है।


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच जब सभी ग्रह आ जाते हैं तब काल सर्प दोष नामक योग का निर्माण होता है।कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति को जीवन में काफी ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है ऐसे में जल्द से जल्द इसका निवारण होना बेहद जरूरी है।

आइए जानते हैं काल सर्प दोष के उपाय क्या है ?

1) काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को घर या मंदिर में जाकर रोजाना शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए।

2) कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को मांसाहार से बचना चाहिए।

3) इसके अलावा उस व्यक्ति को काला नीला कपड़ा नहीं पहन ना चाहिए।

4) कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को महामत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए।

5) इसके अलावा हनुमान चालीसा का रोजाना 11 बार पाठ करना चाहिए।

6) कालसर्प से पीड़ित व्यक्ति को अपने घर में मोरपंख रखने चाहिए।

कालसर्प दोष एवं इसके विधिवत पूजन विधान को लेकर आपके मन में आने वाले कुछ प्रश्न उत्तर सहित —

  • कालसर्प दोष का पूजन कहाँ होता है ?
  • कालसर्प दोष का पूजन उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर होता है ।
  • कालसर्प दोष में सामान्यतः कितना समय लगता है ?
  • कालसर्प दोष में ३ घंटे का समय लगता है ।
  • कालसर्प दोष की पूजा में कितना खर्च आता है ?
  • कालसर्प दोष की पूजा में 2500 से लेकर 3100 तक का खर्च आता है ।
  • कालसर्प दोष पूजन के लिए हमे क्या लाना होता है ?
  • इस पूजा के लिए आपको एक जोड़ वस्त्र अर्थात् कपड़े लाने होते है । जो पूजा के बाद स्नान करके यही क्षिप्रा नदी के घाट पर छोड़ने होते है ।

यदि आप भी कालसर्प दोष से पीड़ित है और आपको भी कालसर्प दोष से हमेशा के लिए छुटकारा चाहिए ।
तो हमसे संपर्क करे !


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